सहअस्तित्व की स्थापना और सरंक्षण ही धर्म प्रज्ञाओं का मुख्य मंतव्य ; निरंकारी

0
949

सहअस्तित्व की स्थापना और सरंक्षण ही धर्म प्रज्ञाओं का मुख्य मंतव्य ; निरंकारी
चंडीगढ़/दिल्ली ; आरके शर्मा राज /करण शर्मा /एनके धीमान/गगनदीप सिंह;— आज संसार बिखरा हुआ और बंटा हुआ है क्योंकि सहनशीलता का स्तर गिर चुका है, जुबान से निकली एक बात भी बर्दाश्त नहीं होती | किसी की भाषा, मजहब, पहरावा और तौर तरिका बर्दाश्त नहीं होता जबकि वली, पीर, पैगम्बरों ने शान्तिपूर्वक सह-अस्तित्व की बात की है | किसी विशेष जाति मजहब के अस्तित्व की बात नहीं की | जिस प्रकार बगीचे मे नाना प्रकार के फूल होते हैं उन्हें कभी लड़ते हुए नहीं देखा गया | अनेकता ही सौंदर्य एवं महत्व का कारण है | इसी प्रकार भक्त भी धरती को सजाते-संवारते हैं और मानवता के लिए वरदान होते हैं |
संत निरंकारी मंडल चंडीगढ ब्रांच के संयोजक श्री मोहिन्द्र सिंह जी ने बताया कि उक्त उद्गार सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने 68वें 3-दिवसीय वार्षिक निरंकारी संत समागम के दूसरे दिन रविवार देर रात खुले सत्र में उपस्थित लाखों श्रद्धालु भक्तों व प्रभु प्रेमियों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए | सन्त समागम में हजारों की संख्या में दूर देशों के प्रतिनिधी भी सम्मिलित हुए हैं |
बाबा जी ने कहा कि साधारणत: मनुष्य स्वयं के लिए ही जीता है एवं स्वयं की जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति तक ही सीमित रहता है | उसमें दूसरों के लिए सहनशीलता एवं त्याग का भाव नही होता | परन्तु सन्त सदैव दूसरों के लिए जीवन जीते हैं | सन्तों की सोच है ‘अपने लिए जिये तो क्या जिये’ | जिस प्रकार नदी एवं वृक्ष सदैव दूसरों के लिए लागर्ज़ परोपकार करते हैं और दूसरों के लिए परोपकार का एक जीता जागता उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, उसी प्रकार मानव के जीवन में भी ईश्वर की अनुभूति के उपरान्त ऐसे भावों का प्रादुर्भाव होता है |
बाबा जी ने कहा कि ईश्वर बोध के द्वारा ही मन को मंदिर बनाया जा सकता है जिससे मानव का व्यवहार सुंदर बन जाता है और आनंदमय जीवन व्यतीत करता है | इस प्रकार जो ज्ञान के प्रकाश में जीवन जीते हैं, अपनेपन के भाव से युक्त हो जाते हैं, उनके लिए कोई भी बेगाना या पराया नहीं रहता और वे मानव को मानव के करीब लाते हैं | सभी इस धरती के वासी है तथा सभी पांच तत्व के पुतले हैं एवं सबमें एक परमात्मा का ही नूर है | प्रत्येक में एक ही चेतन सत्ता का वास होता है |
बाबा जी ने कहा कि आज संसार के वातावरण में भेदभाव है, जाति-पाति की दुहाई देकर नकारा जा रहा है | विडंबना यह है कि नुकसान हो रहे हैं पर फिर भी इन्सान के कदम उस तरफ जाने से रुक नहीं रहे हैं | विश्लेषण करें तो इससे मानवता का सिर्फ नुकसान हुआ है, किसी का भला नहीं हुआ है | इन्सान समय रहते यह समझ जाये और सही रास्ते पर चले जिससे संसार की भलाई हो और वैर-नफ़रत की दीवारें गिरें |
बाबा जी ने कहा कि अज्ञानता वालों के लिए और संकीर्ण दिल वालों के लिए दीवारें महत्वपूर्ण होती हैं परन्तु जो ज्ञान के उजाले में जीते हैं उनके लिए दीवारों की कोई अहमियत नहीं होती, वे सभी प्रकार की दीवारों से ऊपर उठ जाते हैं क्योंकि जीवन वही होता है जो प्यार से जिया जाए अन्यथा चलती फिरती लाश के समान ही है | मात्र धड़कने वाले ही प्राण नहीं होते, वो तो एक खोखलापन है | सही अर्थों में धड़कनें वही हैं जो प्रेम में धड़कती हैं | तभी यह दिल मंदिर बन जाता है और स्वत: ही हृदय में करुणा, दया, परोपकार की भावनाओं का जन्म होता है |
सद्गुरु बाबा जी ने कहा कि आज संसार में प्रेमपूर्ण मानव जीवन की नितांत आवश्यकता है | आज यहाँ बच्चों ने भी मानवता की भलाई के लिए विवेकपूर्ण शब्दों में सन्देश प्रेषित किया | यह प्रमाणित करता है कि मानव की बुजुर्गी आयु पर निर्भर नहीं होती है | अत: मानव को ईश्वर की अनुभूति करके प्रेम और अपनेपन के भाव से युक्त होकर जीवन जीना चाहिए |
सद्गुरु बाबा जी ने समागम पर पधारे हरियाणा के मुख्य मंत्री माननीय श्री मनोहरलाल खट्टर जी, ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर के सांसद श्री मैथ्यू गाय एवं दूर देशों से ४० डाक्टरों की टीम का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने मिशन के प्रेम एवं एकता के संदेश व मिशन द्वारा विश्व स्तर पर की जा रही मानवता की निस्वार्थ सेवा की सराहना की |
समागम में बाबा जी ने मिशन के द्वारा बनाई गई तमिल अवतार बाणी की आडिओ सीडी और पूज्य निरंकारी राजमाता कुलवंत कौर जी के जीवन पर आधारित डाक्युमेन्टरी की डीवीडी का विमोचन किया |
संत समागम में भक्तों के लिए लंगर का प्रबंध किया गया जो कि देश के विभिन्न स्थानों एवं दूर देशों से आये श्रद्धालु भक्तों ने प्रेमपूर्वक मिलकर ग्रहण किया | यह अनेकता में एकता का अनुपम उदाहरण है |
मिशन के गौरवमयी इतिहास व विचारधारा को दर्शाती हुई एक भव्य प्रदर्शनी का समागम स्थल पर आयोजन किया गया है जो कि श्रद्धालु भक्तों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही |

प्रात:कालीन शोभायात्रा
आज प्रात: सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज एवं पूज्य माता सविंदर जी ने समागम स्थल के मैदान नं.१ पर निर्मित रिहायशी टेन्टों में जाकर एक खुले वाहन में खड़े होकर श्रद्धालु भक्तों को दिव्य दर्शन देकर कृतार्थ किया | बाबाजी एवं पूज्य माता जी को अपने सान्निध्य में पाकर भक्त इतने भावविभोर हुए | सद्गुरु के प्रति भक्ति एवं कृतज्ञता के भाव श्रद्धालु भक्तों के चेहरों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो रहे थे | बैण्ड, ड्रम एवं लोक गीतों की धुनों से सजी हुई रंगारंग शोभायात्रा प्रत्येक श्रद्धालु भक्त के हृदय को मंत्रमुग्ध कर रही थी |