डीमेट जांच: सीबीआई के पास मैंन पाॅवर न होने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा ?

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ग्वालियर। (सीएनआई ब्यूरो) 13.08.2015 व्यापम से बड़े डीमेट घोटाले को सीबीआई द्वारा सुप्रीमकोर्ट में मैंन पाॅवर न होने की बात कहकर जांच कर पाने की स्थिति में न होने की बात कही है। जिससे लोगों में चर्चा है कि सीबीआई के बाद और कौन सी एजेंसी है जो व्यापम से बड़े घोटाले डीमेट की जांच करेगी ? व्हिसल ब्लोअर आनंद राय की याचिका पर सीबीआई ने सुप्रीमकोर्ट में डीमेट घोटाले की जांच करपाने में असमर्थता मेंन पाॅवर न होने की वजह से व्यक्त की है। इस पर लोगों ने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीष से मांग की है कि म.प्र. के सबसे बड़े घोटाले डीमेट की जांच के लिये मना करना एक प्रकार से भ्रष्टाचारियों को खुला छोड़ना हैं। एक सीबीआई ही तो ऐसी एजेंसी है। जिससे न्याय की उम्मीद रहती है। वही एजेंसी अगर काम करने के लिये कारण बताने लगेगी तो लोकतंत्र में भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा मिलेगा। चिकित्सा षिक्षा विभाग में लंबे समय से डीमेट के नाम पर हेराफेरी करोड़ों-अरबों की, की गई है। निजी मेडीकल काॅलेजों में मनमानी सीटंे बदली गईं। 721 सरकारी कोटे की सीटंे बेच दी गईं। म.प्र. के कांग्रेस नेताओं ने भी डीमेट में प्रभावषाली व्यक्तियों के परिजनों को हेरफेर से प्रवेष देने के आरोप लगाये थे। सीबीआई द्वारा मना करने पर लोगों में व्यवस्था के प्रति निराषा जागी है। जबकि सीबीआई ने डीमेट घोटाले की व्यापक्ता को कई गुना ज्यादा बताया है। अब देष में ऐसी कौन सी विष्वसनीय एजेंसी है जो इस डीमेटी घोटाले की जांच करेगी। सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीष से इस बारे में कार्यवाही की मांग जागरूक लोगों ने की है।